भगंदर (फिस्ट्यूला) क्या है?

अगर आप बवासीर और भगंदर को एक ही रोग मान रहे हैं तो यह आपकी गलतफहमी है। दरअसल, फिस्टुला एक ऐसा रोग है जिसमें किसी दो अंगों या नसों के बीच जोड़ बन जाता है। यदि व्यक्ति के आंत का आखिरी हिस्सा गुदा के पास की स्किन से जुड़ जाता है तो इसे एनल फिस्टुला या भगंदर कहते हैं। जो कि आमतौर पर किसी चोट, सर्जरी, सूजन या संक्रमण के कारण होता है। भगंदर आमतौर पर एनल ग्लैंड से शुरू होने वाले इंफेक्शन के कारण होता है। इस इंफेक्शन की वजह से वहां मवाद इकट्ठा होने लगती है, जो कि धीरे-धीरे निकलने लगती है या फिर एनस के बराबर वाली त्वचा के द्वारा डॉक्टर की मदद से निकलवाई जाती है।

मुख्य रूप से भगंदर 2 प्रकार की होती है – आंतरिक और बाहरी. आंतरिक भगंदर वो होती है जो गुदा नलिका के अंदर 2-3 सेंटीमीटर ऊपर होती है. आंतरिक भगंदर आम तौर पर पीड़ारहित होती है क्योंकि ऊपरी गुदा नलिका में कोई दर्द तंत्रिका फाइबर नहीं होता है. बाहरी भगंदर वो है जो गुदा नलिका के 2-3 सेंटीमीटर नीचे होती है. इसमें छोटे छोटे मस्से होते हैं जो गुदा की बाहरी परत पर होते हैं. बाहरी भगंदर दर्दनाक होती है क्योंकि गुदा नलिका के निचले हिस्से में दर्द तंत्रिका फाइबर होते हैं.

भगंदर के लक्षण क्या होते हैं?

भगंदर की पहचान कुछ शारीरिक लक्षणों की मदद से की जा सकती हैं। डॉक्टर कुछ ऐसे खास लक्षणों का जिक्र करते हैं जिनकी मदद से भगंदर की पहचान आसानी से की जा सकती है।

  • अगर गुदा मार्ग में बार-बार फोड़ा होता है तो यह भगंदर की वजह हो सकता है।
  • गुदा क्षेत्र में दर्द और सूजन की स्थिति होना।
  • गुदा मार्ग से पस या खून निकलने पर भी भगंदर होने की आशंका होती है।
  • एनस के आस-पास एक गहरा या हल्का छेद और उससे बदबूदार पस का स्राव होना।
  • एनस (गुदा) क्षेत्र में भारी जलन होना भगंदर, बवासीर या फिशर होने का एक कारण हो सकता है। यह जलन पस के बार-बार बाहर निकलने की वजह से होती है।
  • पेट में कब्ज बनना और मलत्याग करते वक्त गुदा क्षेत्र में जलन होना।